पुराना की-पैड फोन

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पुराना की-पैड फोन

एक शहर में रोहित नाम का लड़का रहता था।
वह एक छोटी कंपनी में काम करता था। ऑफिस में सभी लोगों के पास एंड्रॉयड , आईफोन महंगे और नए फोन थे,
लेकिन रोहित का पुराना कीपैड फोन था।

ऑफिस के लोग अक्सर उसका मजाक उड़ाते थे।

“भाई, ये फोन है या इतिहास?”
“इतनी सैलरी में नया फोन तो ले ही सकते हो!”

रोहित बस मुस्कुरा देता।
उसे बुरा तो लगता था, सैलरी में घर खर्च भी तो नहीं चल पाता था , मोबाइल लेने पर तो और प्रॉब्लम होती इसलिए उसने निश्चय किया अभी बह इसी मोबाइल को चलाएगा ।

एक दिन ऑफिस की पूरी टीम पहाड़ों पर ट्रिप के लिए गई।
रास्ते में अचानक आंधी और भारी बारिश शुरू हो गई और बहुत देर तक चलने के कारण सभी के मोबाइल की बैटरी खत्म हो गई और नेटवर्क भी नहीं आ रहे थे
महंगे फोन भी काम नहीं कर रहे थे।

लेकिन रोहित के पास पुराना कीपैड मोबाइल होने के कारण उसे उसने ज्यादा चलाया नहीं जिससे उसकी बैटरी खत्म नहीं हुई ।

उसी फोन से मदद के लिए कॉल किया।
लोकेशन बताई … और पूरी टीम सुरक्षित वापस आ गई।

अब वही लोग, जो उसका मजाक उड़ाते थे, चुप थे उनके चेहरे देखने लायक थे फिर उन लोगों ने भी उसको सॉरी बोला क्योंकि उसके बह सस्ते फोन की वजह से ही सबकी मदद हो सकी ।

तभी उनके मैनेजर ने कहा:

“हर चमकती चीज़ जरूरी नहीं सबसे ज्यादा काम की हो…
और हर पुरानी चीज़ बेकार नहीं होती।”

उस दिन वेदांश ने महसूस किया कि
लोग अक्सर बाहर देखकर फैसला कर लेते हैं,
लेकिन असली कीमत वक्त आने पर पता चलती है।

उसने घर जाकर अपने टूटे फोन को देखा और मुस्कुराकर कहा:

“कमियाँ शर्म की नहीं… पहचान की निशानी भी हो सकती हैं।”

सीख:
लोग क्या कहते हैं, उनके बोलने से आपकी कीमत तय नहीं होती।

हर इंसान में कोई ऐसी खासियत होती है जो सही समय पर चमकती है।

खुद को कभी कम मत समझना चाहिए , चाहे दुनिया आपको कितना भी साधारण क्यों न माने।