एक छोटे से शहर में रहने वाला नीरज बचपन से ही कंप्यूटर का दीवाना था। उसके पास कोई महंगा लैपटॉप नहीं था, न ही तेज इंटरनेट। उसके पिताजी ने एक कंप्यूटर दिलाया उस समय इंटरनेट स्पीड काफी कम होती थी ,कंप्यूटर पर घंटों बैठकर कोड लिखने की कोशिश करता था। उसे अच्छा लगता था जब कोई नया प्रोग्राम बनाता और रन करता था अक्सर उसका इंटरनेट स्पीड कम होती थी क्योंकि डाटा लिमिटेड होता था और यदि कोई सॉफ्टवेयर अपडेट करना होता तो पूरा दिन अपडेट में चला जाता।
एक दिन उसने एक साधारण-सा प्रोग्राम बनाया, लेकिन वह भी ठीक से काम नहीं कर रहा था। उसने सोचा—"शायद ये मेरे बस की बात नहीं है।" उसी रात उसने अपने पुराने नोट्स खोले और देखा कि हर पेज पर एक ही चीज़ लिखी थी—
"हर एरर मुझे कुछ नया सिखाने आया है और कामयाबी के एक और सीढ़ी बनकर आता है । सॉल्व होने पर अलग खुशी का एहसास होगा "
अगले दिन उसने फिर से शुरुआत की। इस बार उसने हर एरर को समझने की कोशिश की । धीरे-धीरे उसका नजरिया बदलने लगा। जहां पहले उसे फेल्योर दिखता था, अब उसे सीखने का मौका दिखने लगा ।
हफ्ते भर की मेहनत के बाद उसने एक ऐप बनाया, जो उसके कस्बे के लोगों की रोज़मर्रा की समस्याओं को हल करता था। शुरू में किसी ने ध्यान नहीं दिया, लेकिन धीरे-धीरे लोग उसका ऐप इस्तेमाल करने लगे।
एक दिन उसे एक बड़ी कंपनी से इंटरव्यू का कॉल आया। इंटरव्यू में उससे पूछा गया—
"आपकी सबसे बड़ी ताकत क्या है?"
नीरज ने मुस्कुराकर कहा—
"मैं एरर से डरता नहीं हूँ, मैं उन्हें सॉल्व करने का प्रयास कर हूं और उनसे दोस्ती कर लेता हूँ।"
उसे नौकरी मिल गई, लेकिन उससे भी बड़ी बात ये थी कि उसने खुद पर भरोसा करना सीख लिया था।
सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में असली सफलता कोड से नहीं, बल्कि धैर्य और नजरिए से आती है। हर बग, हर एरर आपको बेहतर बनाने के लिए ही आता है—बस आपको उसे समझने के लिए धैर्य के साथ हौसला रखना होता है