गरीब किसान का अमीर बेटा

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गरीब किसान का अमीर बेटा

एक छोटे से गाँव में रामू नाम का एक गरीब किसान रहता था। उसके पास थोड़ी-सी जमीन थी, एक पुराना बैल और मिट्टी का छोटा-सा घर। दिन-रात मेहनत करने के बावजूद उसके घर में कभी भरपेट खाना होता, तो कभी बच्चों को भूखा ही सोना पड़ता। भूख के कारण बच्चों को नींद  भी नहीं आती 

रामू का एक बेटा था—मोहन। मोहन पढ़ने में बहुत तेज था। वह अक्सर अपने पिता को खेत में पसीना बहाते देखता और मन ही मन सोचता,

“एक दिन मैं इतना सफल बनूँगा कि पिता को जिंदगी भर मेहनत नहीं करनी पड़ेगी।”

एक दिन रामू ने बेटे से कहा,

“बेटा, हमारे पास धन नहीं है, लेकिन मैं तुझे एक ऐसी चीज जरूर दे सकता हूँ जो कोई चुरा नहीं सकता।”

मोहन ने पूछा, “वह क्या है, पिता जी?”

रामू मुस्कुराया, “मेहनत और सीखने की आदत।”

मोहन ने पिता की बात गांठ बाँध ली। दिन में वह स्कूल जाता और शाम को खेत में पिता का हाथ बँटाता। रात को मिट्टी के दीये की रोशनी में पढ़ाई करता।

गाँव के कई लोग उसका मजाक उड़ाते। कोई कहता,

“गरीब किसान का बेटा पढ़कर क्या करेगा?”

मोहन कुछ नहीं कहता। वह बस मुस्कुराकर अपनी किताब खोल देता।

समय बीतता गया। मोहन ने छात्रवृत्ति हासिल की और शहर जाकर पढ़ाई करने लगा। वहाँ उसने खेती से जुड़ी नई तकनीकें सीखीं। पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने एक छोटी-सी कंपनी शुरू की, जो किसानों को कम पानी में ज्यादा फसल उगाने की तकनीक सिखाती थी।

शुरुआत में उसे बहुत नुकसान हुआ। कई लोगों ने उसका साथ छोड़ दिया। लेकिन मोहन ने हार नहीं मानी।

उसे हमेशा अपने पिता की बात याद रहती—

“मुश्किल वक्त रास्ता रोकने नहीं, रास्ता दिखाने आता है।”

धीरे-धीरे उसकी मेहनत रंग लाई। उसकी कंपनी पूरे देश में प्रसिद्ध हो गई। कुछ ही वर्षों में मोहन करोड़ों का मालिक बन गया।

एक दिन वह अपनी महंगी गाड़ी से गाँव पहुँचा। उसके पिता अब बूढ़े हो चुके थे और खेत में काम करने की हालत में नहीं थे।

मोहन ने पिता के पैर छुए और कहा,

“पिताजी, अब आपको खेत में काम करने की जरूरत नहीं है।”

रामू की आँखों में आँसू आ गए। उसने बेटे से पूछा,

“बेटा, तू इतना बड़ा आदमी कैसे बन गया?”

मोहन ने अपने पिता का हाथ पकड़कर कहा,

“पिताजी, मैं आज अमीर इसलिए नहीं हूँ कि मेरे पास करोड़ों रुपये हैं। मैं अमीर इसलिए हूँ क्योंकि आपने मुझे गरीबी से डरना नहीं, उससे लड़ना सिखाया।”

फिर मोहन ने गाँव के सभी किसानों के लिए मुफ्त प्रशिक्षण केंद्र खोल दिया, ताकि किसी गरीब किसान का बच्चा केवल पैसों की कमी के कारण अपने सपनों को छोड़ न दे।

रामू दूर खड़ा अपने बेटे को देखता रहा। उसके चेहरे पर गर्व की मुस्कान थी।

उस दिन पूरे गाँव को समझ आया कि गरीब होना इंसान की मजबूरी हो सकती है, लेकिन गरीब सोच रखना उसकी पसंद होती है।

सीख:

हालात चाहे कितने भी कठिन हों, अगर मेहनत, शिक्षा और अपने लक्ष्य पर विश्वास बना रहे, तो एक साधारण इंसान भी असाधारण सफलता हासिल कर सकता है।

आज की गरीबी, कल की कहानी बन सकती है—बस हार मत मानो।