श्याम की motivational kahani

Back to Home

श्याम की motivational kahani

मध्य प्रदेश के एक छोटे से गाँव में श्याम नाम का एक लड़का रहता था। उसका परिवार बहुत गरीब था। उसके पिता गाँव की गलियों में हाथ ठेला चलाकर सब्जियाँ बेचते थे। सुबह सूरज निकलने से पहले ही वे काम पर निकल जाते और देर शाम तक मेहनत करते। दिन भर की कमाई से मुश्किल से घर का खर्च चलता था।

श्याम पढ़ाई में बहुत तेज था। जब भी वह स्कूल जाता, उसकी आँखों में बड़े सपने चमकते थे। वह अक्सर सोचता, “एक दिन मैं बड़ा आदमी बनूँगा और अपने माता-पिता की सारी परेशानियाँ दूर कर दूँगा।”

लेकिन किस्मत उसके लिए आसान नहीं थी। कई बार घर में इतनी तंगी हो जाती कि स्कूल की फीस भरना मुश्किल हो जाता। किताबें खरीदने के पैसे नहीं होते। कुछ दिनों तक तो उसे स्कूल छोड़कर अपने पिता के साथ ठेला लगाने भी जाना पड़ता था।

एक दिन उसके पिता ने थके हुए स्वर में कहा, “बेटा, अगर तुम पढ़ाई छोड़कर काम करने लगो तो घर की मदद हो जाएगी।”

श्याम ने अपने पिता की ओर देखा। उनके चेहरे पर गरीबी की लकीरें साफ दिखाई दे रही थीं। उसकी आँखों में आँसू आ गए, लेकिन उसने मन ही मन एक फैसला कर लिया।

उस रात उसने लालटेन की मंद रोशनी में बैठकर खुद से कहा, “गरीबी मेरी पहचान नहीं बनेगी। मैं मेहनत करूँगा और अपनी किस्मत बदलूँगा।”

इसके बाद श्याम ने संघर्ष को अपना साथी बना लिया। दिन में वह पिता की मदद करता और रात में पढ़ाई करता। जब किताबें नहीं होतीं, तो वह दोस्तों से किताबें लेकर पढ़ता। स्कूल से लौटने के बाद वह खेत के किनारे बैठकर घंटों पढ़ाई करता।

गाँव के कई लोग उसका मज़ाक उड़ाते थे।

"अरे श्याम, पढ़-लिखकर क्या कलेक्टर बनेगा?" लोग हँसते हुए कहते।

लेकिन श्याम मुस्कुरा देता और अपने काम में लग जाता। उसे पता था कि जवाब शब्दों से नहीं, सफलता से देना है।

समय बीतता गया। उसने दसवीं और बारहवीं में बहुत अच्छे अंक प्राप्त किए। उसकी मेहनत देखकर एक शिक्षक ने उसकी मदद की और आगे की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति दिलवाई। अब श्याम पहले से भी ज्यादा मेहनत करने लगा।

कई सालों की कठिन तपस्या के बाद उसने एक बड़ी प्रतियोगी परीक्षा पास कर ली। जिस लड़के के पास कभी किताबें खरीदने के पैसे नहीं थे, वही आज एक बड़े अधिकारी के पद पर पहुँच गया।

जब वह पहली बार सरकारी गाड़ी में अपने गाँव लौटा, तो पूरा गाँव उसे देखने के लिए इकट्ठा हो गया। उसके पिता की आँखों में खुशी के आँसू थे। वही हाथ, जो कभी ठेला खींचते-खींचते थक जाते थे, आज गर्व से अपने बेटे के कंधे पर रखे हुए थे।

श्याम ने गाँव के बच्चों से कहा—

“गरीबी कभी सपनों को नहीं रोकती। सपनों को केवल हार मानने की आदत रोकती है। अगर हालात कठिन हैं, तो समझ लो कि मंज़िल भी बड़ी है। अपनी खूबी को समझो और मेहनत करो”

उस दिन गाँव के बच्चों ने सीखा कि सफलता अमीर घर में जन्म लेने से नहीं, बल्कि बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की हिम्मत रखने से मिलती है।

सीख:

जिस इंसान के पास मेहनत, धैर्य और अपने लक्ष्य के प्रति विश्वास होता है, उसे दुनिया की कोई गरीबी नहीं रोक सकती। परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन हों, लगातार प्रयास करने वाला व्यक्ति एक दिन जरूर सफल होता है।